जरूरत है अपनों के साथ की और एक प्यारे से अहसास की


हां परेशानियां है मेरी जिंदगी में. बहुत परेशानियां इतनी की कभी कभी तो इतना उदास हो जाता हूं कि समझ नहीं आता कि क्या करे और क्या नहीं. क्योकि मुझे खुद की फिक्र है और उससे ज्यादा अपनों की. मैं नहीं चाहता हूं कि मेरे साथ मेरे अपने भी परेशानियों का सामना करे. दुःख झेले. मैं उनके लिए हर परेशानी सहने को तैयार हूं किन्तु में नहीं चाहता हूं की मेरे साथ मेरा घर परिवार भी उस लम्बी लाइन में खड़ा हो जहा मैं खड़ा हूं. मैं उन्हें उनका बेहतर कल नहीं बल्कि आज भी बेहतर देना चाहता हूं. उन्हें हर हाल में खुश देखना चाहता हूं, क्योकि जो भी है सब वही तो है. 


मुझे खुद पर भरोसा थोड़ा कम है कि मैं कुछ कर पाऊंगा या नहीं किन्तु उन्हें मुझ पर पूरा भरोसा है जो मुझे चाहते है. और मैं भी यह चाहता हूं कि मैं उनके भरोसे पर खरा उतरु. क्योंकि वो मेरे लिए बने है तो मैं भी उनके लिए बना हूँ. मुझे देखकर उन्हें ख़ुशी होती है. शायद जितना मैं उनके लिए ख़ुशी का कारण हूं, उतना ही मेरे लिए मेरे लिए भी वो है. क्योंकि उनकी एक मुस्कान सारी थकान सारी मुश्किलें को भुला देती है. यदि मैं उनसे जिंदगी में कुछ उल्टा सीधा हो जाने पर कहता हूं कि .....ऐसा हो गया है तो उनका बस यही कहना रहता है कि कोई बात नहीं धीरे धीरे सब ठीक हो जायेगा. तुम इससे भी अच्छा करोगे. बस यही बाते तो इंसान को जिन्दा रखे रहती है.

प्यार, मोहब्बत, दोस्ती, घर-परिवार सब एक ही है. और यही वे चीजे है जो इंसान को कभी हारने नहीं देती है. बस जरूरत है .......अपने रिश्ते को ईमानदारी से निभाने की..... खुशिया बांटने की,....... प्यार लुटाने की. फिर आप सबसे अच्छे इंसान बन सकते हो. अपनी उदासी भूल सकते हो. मैं भी अपनों के साथ मिलकर यही कोशिश कर रहा हूं. और यह जो में बार बार कह रहा हूं वह मैं अकेला नहीं हूं बल्कि ऐसे लाखो लोग है.बस जरूरत है अपनों के साथ की और एक प्यारे से अहसास की. 
कवि बलराम सिंह राजपूत





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